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प्यारी जू जैसैं तेरी आँखिन में हौं अपनपौ-देखत हौं, ऐसैं तुम देखति हौ किधौं नाहीं?

प्यारी जू जैसैं तेरी आँखिन में हौं अपनपौ-देखत हौं, ऐसैं तुम देखति हौ किधौं नाहीं?
हौं तोसौं कहौं प्यारे आँखि मूँदि रहौं, तौ लाल निकसि कहाँ जाहीं?
मौकौं निकसिबे कौं ठौर बतावौ, साँची कहौ बलि जाहुँ लागौं पाँहीं।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा-तुमहिं देख्यौ चाहत और सुख लागत काँहीं॥6॥ [राग कान्हरौ]