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ऐसैं ही देखत रहौं, जनम सुफ़ल करि मानौं।

ऐसैं ही देखत रहौं, जनम सुफ़ल करि मानौं।
प्यारे की भाँवती, भाँवती जू के प्रान-प्यारे, जुगलकिसोरहिं जानौं॥
छिनु न टरौं, पल हौंहुँ न इत-उत, रहौं एक ही तानौं।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा-कुंजबिहारी मन-रानौं॥3॥ [राग कान्हरौ]